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वास्तविक बने रहें


वास्तविक होना मतलब आप जैसे है वैसे ही रहना।


एक बार जब आप स्वयं को स्वीकार कर लेते हैं (जैसा कि पिछले वीडियो में बताया गया है), तो वास्तविक बनना आसान हो जाता है।


अक्सर हम समाज की अपेक्षाओं के अनुसार जी रहे होते हैं, भले ही अधिकांश समय हम इसकी शर्तों से सहमत नहीं होते हैं। हम उन रिश्तों या अपनी छवि को खतरे में नहीं डालना चाहते हैं जो हमने मुखौटा पहनकर बनाई हैं और इसलिए हम एक नकली इमेज के साथ रहना जारी रखते हैं।


और कहीं न कहीं, हम उस नकली जीवन के इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि हमें एहसास ही नहीं होता कि हम अपने वास्तविक स्व को खो रहे हैं। हम दिन-ब-दिन ऐसे काम कर रहे हैं जो तथाकथित समाज के मानदंडों के अंतर्गत आते हैं। हम अलग ढंग से सोचने की हिम्मत भी नहीं करते।


हम अपने आप को इस डर से बंद कर देते हैं - दूसरे क्या सोचते हैं?

क्योंकि जैसा कि प्रसिद्ध कहावत है - 'सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग'।


मैंने देखा है कि कुछ लोग तो दूसरे लोग क्या सोचेंगे इस डर से दिल खोलकर हंसते नहीं हैं? मैंने लोगों को सच नहीं बोलते देखा है, क्योंकि यह कड़वा होता है तो यह कैसा दिखेगा? मैंने लोगों को एक निश्चित तरीके से कपड़े पहने देखा है, भले ही वे उन कपड़ों में ज़रा भी कोमफ़ोर्टेबल नहीं हैं - क्योंकि वे समाज के कुछ भागो में फिट होना चाहते हैं। मैंने लोगों को हर समय सभी से मीठा बोलते होते देखा है, भले ही वे भीतर से कड़वाहट से भरे हाई क्यूँ ना हो। अगर उन्होंने ये सब नहीं किया तो उनका असली चेहरा सामने आ जाएगा और उनकी नकली छवि जो उन्होंने वर्षों से बनाई है, नष्ट हो जाएगी।


वे एक निश्चित तरीके से व्यवहार करते हैं, वे एक निश्चित तरीके से तैयार होते हैं, भले ही वे सहज न हों, क्योंकि वे लगातार जज किए जाने के डर में रहते हैं। वे अपने बच्चों को भी सहज होने से रोकते हैं क्योंकि लोग क्या कहेंगे, लोग उनके बच्चों के व्यवहार से उनके बारे में क्या सोचेंगे।


सच तो यह है की कोई किसी के बारे में नहीं सोचता, किसी के पास इतना वक्त ही नहीं है । हर कोई सिर्फ दूसरों से मनोरंजन चाहता है इसलिए आप चाहे जो भी व्यवहार करें, आपको आंका जाएगा, तो आप खुद क्यों न वो करे जो आप दिल से चाहते हों । क्यों परेशान होना?

अब जरा आराम से बैठिए और सोचिए- लोग क्या सोचेंगे, इस डर में लगातार जीकर आप क्या खो रहे हैं?

आप खो रहे हैं - खुद को


सवाल यह है कि आप वास्तविक कैसे बने रह सकते हैं?


यह आसान है - बिना एक सेकंड बर्बाद किए आपका दिल जो कहता है, वही करें । अगर यह करने से आपको ख़ुशी मिलती है और आपको शांति का अनुभव होता है तो आप वो काम करें - चाहे दुनिया के लिए वो कितना ही मूर्खतापूर्ण क्यूँ ना हो । जब तक आप किसी भी रूप में जानबूझकर किसी को चोट नहीं पहुंचा रहे हैं, तो वही करें जो आपका दिल करे और अपनी शर्तों पर अपना जीवन जिएं।


इसके साथ छोटी शुरुआत करें:

- आपका जो दिल करे वो पहनिये

- खुद पर हँसिये

- अपने मन की बात की बात बोलिए

- अपने विश्वासों का पालन करना


नतीजा: आप खुद से प्यार करने लगेंगे और जो मुखौटा आप सालों से पहने हुए थे वह चला जाएगा। आप अपने वास्तविक स्व होंगे।


और स्वयं होने से बड़ी शांति और क्या हो सकती है?


स्वयं बनने के तरीकों के बारे में हमारी फ्री किट का लिंक इधर है

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